ख़ुलासा क़ुरआन करीम पारा नंबर 02 संक्षिप्त सार
1. तब्दील-ए-क़िब्ला (क़िब्ला परिवर्तन)
हिजरत के बाद मदीना में सोलह या सत्रह महीने तक मुसलमान बैतुल मक़दिस की तरफ़ रुख करके नमाज़ पढ़ते रहे। उसके बाद अल्लाह तआला के हुक्म से काबा को क़िब्ला बना दिया गया और मुसलमानों को उसी की ओर रुख करने का आदेश दिया गया।
2. आयत-ए-बिर्र (नेकी की आयत)
"लैस अल-बिर्र अन तुवल्लू वुजूहकुम…" (सूरह अल-बक़रा: 177)
यह एक बहुत बड़ी आयत है। इसमें तमाम हुक्म, अक़ाएद (विश्वास), इबादतें, मुआमलात, मुआशरत और अख़लाक़ का इजमाली तौर पर ज़िक्र किया गया है। इस आयत में नेकी के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- सफ़ा और मरवा की सई
- मरद और औरतों के नाजायज़ ताल्लुक़ात की हरामियत
- क़िसास (बदला)
- वसीयत
- रोज़े
- एतिकाफ़
- हराम कमाई से बचना
- चाँद और महीनों का बयान
- जिहाद
- शराब और जुए की मनाही
- अल्लाह की राह में ख़र्च करना
- यतीमों के साथ अच्छा बर्ताव
- निकाह
- मुशरिकों से निकाह की मनाही
- हयज़ (मासिक धर्म) के मसाइल
- ईला
- तलाक़
- इद्दत
- रज़ाअत (दूध पिलाने के अहकाम)
- मेहर
- हलाल और हराम का बयान
- मस्जिद से संबंधित मसाइल
3. ताऊन Plague की बीमारी का वाक़िआ
कुछ लोग प्लेग से परेशान थे, वे मौत के डर से दूसरे शहर चले गए, अल्लाह (ने दो फरिश्तों को भेजा और उन्हें मार डाला (ताकि लोगों को पता चले कि कोई भी मौत से बच नहीं सकता)। कुछ समय बाद, अल्लाह (ने दो फरिश्तों को भेजा और उन्हें मार डाला (ताकि लोगों को पता चले कि कोई भी मौत से बच नहीं सकता)। कुछ समय बाद, अल्लाह (ने दो फरिश्तों को भेजा और उन्हें मार डाला) ने एक नबी की दुआ के बाद उन्हें फिर से ज़िंदा कर दिया।
4. क़िस्सा-ए-तालूत (जारी)
तालूत के ज़रिये अल्लाह तआला ने जालूत के लश्कर को शिकस्त दी।
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